मध्य प्रदेश

जनसुनवाई में वृद्ध का हंगामा, सुरक्षाकर्मियों ने बाहर निकाला, पुरानी शिकायत का हल नहीं होने से नाराज

Kavita2
30 Sept 2026 12:39 PM IST
जनसुनवाई में वृद्ध का हंगामा, सुरक्षाकर्मियों ने बाहर निकाला, पुरानी शिकायत का हल नहीं होने से नाराज
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मध्य प्रदेश ; कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान उस समय हंगामेदार स्थिति बन गई, जब लंबे समय से अपनी समस्या के समाधान की मांग लेकर पहुंच रहे एक वृद्ध ने कलेक्टर के सामने नाराजगी जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। स्थिति बिगड़ते देख सुरक्षाकर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा और वृद्ध को सभाकक्ष से बाहर ले जाया गया।

बताया जा रहा है कि वृद्ध पिछले काफी समय से अपनी समस्या को लेकर जनसुनवाई में आ रहे हैं। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने और अधिकारियों के सामने अपनी परेशानी रखने के बावजूद समाधान नहीं हुआ। मंगलवार को भी वह इसी उम्मीद में जनसुनवाई में पहुंचे थे कि उनकी समस्या पर ठोस कार्रवाई होगी।

जनसुनवाई के दौरान जब उनकी बारी आई तो उन्होंने कलेक्टर के सामने अपनी शिकायत दोहराई। बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान वृद्ध भावुक और आक्रोशित हो गए। उन्होंने अपनी बात तेज आवाज में रखनी शुरू कर दी। कुछ देर में स्थिति हंगामेदार हो गई और सभाकक्ष में मौजूद अधिकारियों तथा अन्य आवेदकों का ध्यान उनकी ओर चला गया।

सुरक्षाकर्मियों ने वृद्ध को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन वह लगातार अपनी समस्या का समाधान नहीं होने को लेकर नाराजगी जताते रहे। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें पकड़कर सभाकक्ष से बाहर कर दिया। इस दौरान कुछ समय के लिए जनसुनवाई की सामान्य प्रक्रिया भी प्रभावित हुई।

इस मामले की खास बात यह है कि वृद्ध पहले भी अपनी समस्या को लेकर चर्चा में आ चुके हैं। पूर्व में वह जनसुनवाई में बिना शर्ट के पहुंच गए थे और अपनी परेशानी की ओर अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की थी। उस समय भी मामला कलेक्टर के सामने पहुंचा था।

बताया जा रहा है कि पिछली जनसुनवाई में कलेक्टर ने संबंधित नगर निगम अधिकारियों को वृद्ध की समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद वृद्ध का आरोप है कि निगम की ओर से अब तक उनकी परेशानी का स्थायी समाधान नहीं किया गया। इसी बात को लेकर उनकी नाराजगी बढ़ती गई।

वृद्ध का कहना है कि वह लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। हर बार उन्हें आश्वासन मिलता है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। मंगलवार की घटना को भी इसी लंबे इंतजार और लगातार शिकायत के बाद पैदा हुई नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है।

जनसुनवाई का उद्देश्य आम नागरिकों की शिकायतों और समस्याओं को सीधे प्रशासन के सामने रखना होता है। इसमें विभिन्न विभागों से संबंधित आवेदन लिए जाते हैं और संबंधित अधिकारियों को समयसीमा के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाते हैं। बड़ी संख्या में लोग जमीन, राजस्व, पेंशन, नगर निगम, बिजली, पानी, सड़क और अन्य समस्याओं को लेकर जनसुनवाई में पहुंचते हैं।

ऐसे में किसी शिकायतकर्ता का बार-बार एक ही समस्या लेकर पहुंचना संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। यदि पहले ही निर्देश दिए जा चुके थे तो उनका पालन क्यों नहीं हुआ, यह भी जांच का विषय बन गया है।

मंगलवार की घटना के बाद सभाकक्ष में मौजूद अन्य लोगों के बीच भी चर्चा होती रही। कुछ लोगों ने वृद्ध की नाराजगी को लंबे समय से समाधान नहीं मिलने का परिणाम बताया, जबकि अधिकारियों ने कहा कि जनसुनवाई के दौरान अनुशासन बनाए रखना भी जरूरी है।

प्रशासनिक स्तर पर ऐसे मामलों में संबंधित विभाग से रिपोर्ट मांगी जा सकती है कि शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई की गई और यदि समाधान नहीं हुआ तो उसकी वजह क्या रही। यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों से जवाब मांगा जा सकता है।

नगर निगम से जुड़ी शिकायत होने के कारण अब निगम अधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। कलेक्टर द्वारा पहले निर्देश दिए जाने के बावजूद समस्या लंबित रहने की बात सही पाई जाती है तो निगम से विस्तृत जवाब मांगा जा सकता है।

वृद्ध के व्यवहार को लेकर भी प्रशासन ने सावधानी बरतने की जरूरत समझी है। बार-बार जनसुनवाई में आक्रोश की स्थिति बनने से सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ता है। अधिकारियों ने शिकायतकर्ताओं से अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने की अपील की है।

हालांकि इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि जनसुनवाई में दिए जाने वाले निर्देशों की निगरानी कितनी प्रभावी है। यदि संबंधित विभाग समय पर कार्रवाई न करे तो शिकायतकर्ता को बार-बार कलेक्ट्रेट पहुंचना पड़ता है।

जनसुनवाई में आने वाले अधिकतर लोग अपनी समस्याओं का त्वरित समाधान चाहते हैं। ऐसे में प्रशासनिक निर्देशों पर अमल न होने से लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। वृद्ध का मामला इसी व्यवस्था की एक चुनौती के रूप में सामने आया है।

मंगलवार की घटना के बाद प्रशासन अब इस शिकायत की दोबारा समीक्षा कर सकता है। संबंधित विभाग से यह जानकारी मांगी जा सकती है कि पूर्व निर्देश के बाद क्या कार्रवाई की गई और समाधान अब तक क्यों लंबित है।

फिलहाल जनसुनवाई में हुए हंगामे के बाद वृद्ध को सभाकक्ष से बाहर कर दिया गया, लेकिन उनकी मूल समस्या अब भी समाधान की प्रतीक्षा में है। इस घटना ने प्रशासन के सामने यह जिम्मेदारी भी बढ़ा दी है कि केवल शिकायत सुनना ही नहीं, बल्कि पहले दिए गए निर्देशों का समय पर पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

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